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सफलता की कहानी; स्यालसू गांव के सुभाष रावत: मत्स्यपालन से आत्मनिर्भरता की मिसाल।

*सफलता की कहानी; स्यालसू गांव के सुभाष रावत: मत्स्यपालन से आत्मनिर्भरता की मिसाल।

*मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की स्वरोजगार योजनाओं से पहाड़ के युवाओं को मिला नया सहारा*

टिहरी जनपद के फकोट ब्लॉक के स्यालसू गांव के युवा सुभाष रावत ने मत्स्यपालन के जरिये आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम की है।

होटल मैनेजमेंट में डिप्लोमा करने के बाद सुभाष रावत प्राइवेट सेक्टर में काम कर रहे थे, लेकिन कोविड-19 के दौरान नौकरी छूटने से उन्हें मुश्किल दौर का सामना करना पड़ा। हार मानने की बजाय उन्होंने अपने गांव लौटकर स्वरोजगार का रास्ता चुना।

उन्होंने मत्स्य विभाग की योजना के तहत तालाब निर्माण के लिए आवेदन किया। विभाग की सहायता से लगभग 20×10×1.5 मीटर आकार का तालाब बनाया गया और मत्स्य बीज के रूप में फिंगरलिंग व क्रासफिश उपलब्ध कराई गईं।

सरकार से मिले अनुदान और प्रशिक्षण की मदद से सुभाष ने मत्स्य पालन शुरू किया और धीरे-धीरे उत्पादन बढ़ाते गए।

वित्तीय वर्ष 2020–21 में उन्होंने 5.80 क्विंटल मछलियों का उत्पादन कर ₹0.66 लाख की आय प्राप्त की।
वहीं 2021–22 में 6.87 क्विंटल उत्पादन कर लगभग ₹0.96 लाख की आय अर्जित की।

आय में लगातार वृद्धि के साथ सुभाष ने अब मॉडर्न फिश आउटलेट भी शुरू किया है, जहाँ से वे अपने उत्पाद बेचते हैं। इस आउटलेट से तीन स्थानीय युवाओं को रोजगार मिला है और आसपास के ग्रामीण भी मत्स्यपालन से जुड़ रहे हैं।

सुभाष रावत की मेहनत और लगन ने यह साबित किया है कि अगर नीयत सच्ची हो और दिशा सही मिले, तो पहाड़ का युवा भी अपने गांव में रहकर आत्मनिर्भर बन सकता है।

सुभाष रावत, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की आत्मनिर्भर उत्तराखंड की सोच को साकार करने वाले प्रेरक युवा किसान हैं।

 

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