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जिलाधिकारी टिहरी गढ़वाल नितिका खण्डेलवाल की अध्यक्षता में जिला समन्वयन समिति एवं SARRA की जिला स्तरीय कार्यकारी समिति (DLEC) की बैठक आयोजित।

जिला समन्वय समिति एवं जिला स्तरीय कार्यकारी समिति की बैठक संपन्न*

जिलाधिकारी टिहरी गढ़वाल नितिका खण्डेलवाल की अध्यक्षता में जिला समन्वयन समिति एवं SARRA की जिला स्तरीय कार्यकारी समिति (DLEC) की बैठक आयोजित की गई।

बैठक में जिलाधिकारी नितिका खण्डेलवाल ने निर्देश दिए कि जिन जल स्रोतों में पूर्व में जल उपलब्ध था, उनकी भी मैपिंग कर वर्तमान स्थिति का आकलन किया जाए। उन्होंने वन विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर कार्ययोजना तैयार करने तथा उसमें वन पंचायतों की सक्रिय भागीदारी एवं प्रस्तावित गतिविधियों का समुचित समावेश सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही, उन्होंने राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान (NIH) द्वारा उपलब्ध कराई गई जल संसाधनों संबंधी रिपोर्ट का विस्तृत अध्ययन कर आवश्यक जानकारी प्राप्त करने के आदेश भी दिए।

मुख्य विकास अधिकारी वरुणा अग्रवाल ने निर्देशित किया कि प्रत्येक ग्राम का एक ‘वन-पेजर’ तैयार किया जाए, जिसमें बंजर एवं कृषि योग्य भूमि, सिंचित क्षेत्र, निर्धारित समयावधि में किए गए कार्यों का प्रभाव तथा प्राप्त परिणामों का स्पष्ट विवरण अंकित किया जाए, ताकि योजनाओं की प्रगति एवं उपलब्धियों का प्रभावी मूल्यांकन किया जा सके।

बैठक में उप निदेशक सर्वेश्वर द्वारा जल संरक्षण अभियान की रणनीति के प्रमुख बिंदुओं की जानकारी दी गई। उन्होंने जल संरक्षण अभियान में जनभागीदारी सुनिश्चित करने, सूख रहे जल स्रोतों, सहायक नदियों एवं धाराओं के पुनर्जीवन, जलागम क्षेत्रों के उपचार हेतु योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, भागीरथी मोबाइल ऐप के माध्यम से चिन्हित जल स्रोतों के उपचार, ऐतिहासिक, पौराणिक एवं सांस्कृतिक महत्व के धारे-नालों के जीर्णोद्धार तथा ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन रिवर’ के तहत चयनित नदियों एवं उनकी सहायक धाराओं के संरक्षण एवं उपचार योजनाओं में जनसहभागिता और क्षमता विकास जैसे विषयों पर अवगत कराया।

इसके पश्चात विश्व बैंक वित्तपोषित उत्तराखंड जलवायु अनुकूलीकरण बरानी कृषि परियोजना की कार्ययोजना एवं प्रगति की समीक्षा की गई। बैठक में बताया गया कि परियोजना का मुख्य उद्देश्य उत्तराखंड के चयनित सूक्ष्म जलागम क्षेत्रों में पर्वतीय कृषि को अधिक लाभकारी, जलवायु अनुकूल एवं ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करने में सक्षम बनाते हुए सुदृढ़ उत्पादन प्रणाली विकसित करना है।

इस दौरान परियोजना के प्रदर्शन सूचकों की जानकारी देते हुए बताया गया कि कृषि भूमि क्षेत्रों से ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में 5 प्रतिशत की कमी, लक्षित फसलों की उत्पादकता में 20 प्रतिशत की वृद्धि, लक्षित स्प्रिंगशेड क्षेत्रों में जल प्रवाह/जल उपलब्धता में 30 प्रतिशत की वृद्धि तथा कृषक परिवारों की कृषि आधारित घरेलू आय में 25 प्रतिशत की वृद्धि का लक्ष्य प्राप्त किया गया है।

बैठक में डीएफओ संदीपा शर्मा, हिम्मोथन सोसाइटी से दर्शन सिंह व दुर्गा प्रसाद, लघु सिंचाई से डी सी मिश्रा, किसान विज्ञान केंद्र से डॉ आलोक येवले, ग्रामीण विकास से महाबीर सिंह व रोशन लाल आदि संबंधित उपस्थित रहे।

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