khabaruttrakhand
आकस्मिक समाचारउत्तराखंडटिहरी गढ़वालदिन की कहानीप्रभावशाली व्यतिराजनीतिकराष्ट्रीयविशेष कवर

पालना’ बना कामकाजी माताओं का भरोसेमंद सहारा* ‎ ‎*मुख्यमंत्री की पहल को टिहरी में मिल रहा धरातल पर आकार।

पालना’ बना कामकाजी माताओं का भरोसेमंद सहारा*

‎*मुख्यमंत्री की पहल को टिहरी में मिल रहा धरातल पर आकार, डीएम नितिका खण्डेलवाल के निर्देश पर 15 क्रेच केंद्र संचालित; जल्द बढ़ाई जाएगी संख्या*

‎*सूचना/टिहरी/06 सितंबर, 2026;*
‎मां के लिए अपने बच्चे से बढ़कर कुछ नहीं होता, लेकिन परिवार की जिम्मेदारियों के लिए जब उसे काम पर निकलना पड़े तो छोटे बच्चे की देखभाल सबसे बड़ी चिंता बन जाती है। टिहरी जनपद में क्रेच आंगनवाड़ी ‘पालना’ ऐसी ही कामकाजी और श्रमिक माताओं के लिए भरोसे का सहारा बनकर सामने आई है। अब माताएं अपने नौनिहालों को सुरक्षित हाथों में छोड़कर निश्चिंत होकर रोजगार और आजीविका से जुड़े कार्य कर पा रही हैं।

‎मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पहल को धरातल पर उतारते हुए जिलाधिकारी नितिका खण्डेलवाल के निर्देश पर बाल विकास विभाग द्वारा जनपद में 15 क्रेच आंगनवाड़ी ‘पालना’ केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। इन केंद्रों का लाभ अधिक से अधिक बच्चों और कामकाजी महिलाओं तक पहुंचाने के लिए भविष्य में इनकी संख्या बढ़ाई जाएगी।

‎क्रेच ‘पालना’ में 7 माह से 3 वर्ष तक के बच्चों की देखभाल की जाती है। यहां बच्चों को उनकी उम्र के अनुरूप पौष्टिक आहार, स्वच्छता, आराम और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जाता है। बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए खेल-खेल में सीखने, कहानी-कविता, चित्र पहचान, खिलौनों से गतिविधियां और आपसी बातचीत जैसी गतिविधियां कराई जाती हैं। साथ ही बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण पर भी नियमित नजर रखी जाती है।

‎जिला कार्यक्रम अधिकारी बाल विकास संजय गौरव ने बताया कि जिलाधिकारी के निर्देशानुसार जनपद में 15 क्रेच केंद्र शुरू किए गए हैं। इनका उद्देश्य कामकाजी एवं श्रमिक महिलाओं को छोटे बच्चों की सुरक्षित देखभाल की सुविधा उपलब्ध कराना है, ताकि वे बिना किसी चिंता के अपने रोजगार एवं आजीविका से जुड़ी रह सकें। भविष्य में केंद्रों की संख्या बढ़ाकर अधिक से अधिक महिलाओं और बच्चों को लाभान्वित करने का प्रयास किया जाएगा।

‎ढूंगीधार क्रेच की कार्यकत्री साजिया खान बताती हैं कि छोटे बच्चों की देखभाल में सुरक्षा के साथ अपनापन और खुशी का माहौल जरूरी है। केंद्र में बच्चों को उनकी उम्र व रुचि के अनुसार खेल एवं गतिविधियों से जोड़ा जाता है तथा भोजन, स्वच्छता और आराम का विशेष ध्यान रखा जाता है। उन्होंने बताया कि बच्चों को सुरक्षित और खुश देखकर माताओं का भरोसा बढ़ा है। ‘पालना’ का उद्देश्य यही है कि मां निश्चिंत होकर काम कर सके और बच्चा स्नेहपूर्ण वातावरण में सुरक्षित रहे।

‎‘पालना’ केंद्रों ने माताओं की चिंता कम करने के साथ उन्हें आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ने का अवसर दिया है। मां जब रोजगार के लिए घर से निकलती है, तो उसके बच्चे की सुरक्षा और देखभाल की जिम्मेदारी ‘पालना’ संभाल रहा है। इस पहल से एक ओर नौनिहालों को पोषण, सुरक्षा और सीखने का बेहतर वातावरण मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर माताओं के लिए रोजगार से जुड़े रहने की राह आसान हो रही है।

Related posts

अपर सचिव, आयुष एवं आयुष शिक्षा, राजस्व विभाग, उत्तराखंड शासन ने थौलधार विकास खण्ड के इस ग्राम पंचायत का किया भ्रमण।”

khabaruttrakhand

जनपद टिहरी गढ़वाल में एनीमिक पीड़ित किशोरियों के स्वास्थ्य के मध्येनजर बनाये जा रहे हैं आयरन युक्त लड्डू।

khabaruttrakhand

नशा तस्करों पर उत्तरकाशी पुलिस का प्रहार जारी,अवैध चरस के साथ एक तस्कर गिरफ्तार।

khabaruttrakhand

Leave a Comment

Verified by MonsterInsights