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ब्रेकिंग:-अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश में आजादी का पर्व स्वतंत्रता दिवस धूमधाम से मनाया गया।

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश में आजादी का पर्व स्वतंत्रता दिवस धूमधाम से मनाया गया।

इस अवसर पर संस्थान की कार्यकारी निदेशक प्रोफेसर डा. मीनू सिंह ने झंडारोहण किया।

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स्वतंत्रता दिवस समारोह में संस्थान के फैकल्टी सदस्य, चिकित्सक, अधिकारी व कर्मचारियों ने बढ़चढ़कर प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने सभी को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि यह दिन हम सभी के लिए बेहद खास है।

इस साल आजादी के 75 वर्ष पूरे हो गए हैं, लिहाजा आज के दिन को समूचा देश आजादी के अमृत महोत्सव के रूप में मना रहा है। कार्यकारी निदेशक एम्स ने कहा कि यह हम भारतीयों के लोकतंत्र का सबसे बड़े त्योहार और उत्सव का दिन है। उन्होंने कहा कि इस बात का गर्व है कि हम एक ऐसे प्रोफेशन से जुड़े हैं जिसका महत्व कोविडकाल में देश के प्रत्येक नागरिक ने जाना और माना।

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वैसे भी एक सामान्य व्यक्ति डॉक्टर में भगवान का स्वरूप देखता है और उससे चमत्कार की अपेक्षा रखता है, भले ही मरीज को अस्पताल लाने में देर हो गई हो और डॉक्टर भी अंत तक अपनी कोशिश जारी रखता है।

उन्होंने बताया ​कि ऑपरेशन थियेटर और ट्रीटमेंट रूम में जारी इलाज के साथ साथ मरीज के परिजनों से किया जाने वाला संवाद को भी उतनी ही अहमियत देना चाहिए क्योंकि यह एक लीगल बाउंडिग भी है, लिहाजा हमें मेडिकल स्किल के साथ साथ सॉफ्ट स्किल पर भी जोर देना होगा।
समारोह में डीन (एकेडमिक) प्रोफेसर मनोज गुप्ता, एमएस प्रो. संजीव मित्तल, उपनिदेशक( प्रशासन) अच्युत रंजन मुखर्जी, वित्त सलाहकार ले.कर्नल डब्ल्यू. एस. सिद्घार्थ, प्रोफेसर गीता नेगी, डा. मोनिका पठानिया,डा. रश्मि मल्होत्रा, रजिस्ट्रार राजीव चौधरी, ईई अजय गुप्ता, पीआरओ हरीश थपलियाल, विधि अधिकारी पीसी पांडे, एसएओ शशिकांत आदि ने शिरकत की।
समारोह को संबोधित करते हुए एम्स निदेशक ने बताया कि इसी वर्ष हमारे संस्थान को एक दशक पूर्ण हो जाएगा,
एम्स कार्यकारी निदेशक प्रो. डा. मीनू सिंह ने बताया कि इंस्टिट्यूट आज जिस मुकाम पर पहुंचा है इसमें संस्थान से जुड़े चिकित्सकीय, गैर चिकित्सकीय कार्मिकों का संयुक्त योगदान रहा है। इस दौरान उन्होंने अपनी प्राथमिकताएं बताई और कहा ​कि पिछले दस वर्षों में हम संस्थान में जो सुविधाएं उपलब्ध नहीं करा पाए, आज हमारी प्राथमिकता उन्हें स्थापित करने की होनी चाहिए। बताया कि उत्तराखंड जैसे विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले पहाड़ी राज्य में यदि मरीज आवागमन या अन्य तरह के संसाधनों के ​अभाव में अस्पताल तक नहीं पहुंच पाता है तो
हमे उन तक टेलिमेडिसिन द्वारा पहुंचना है।
उन्होंने बताया कि एम्स एक टर्सरी केयर सेंटर है, मगर यहां बड़ी तादात ऐसे मरीजों की भी आती है जिन्हें प्राइमरी या सेकेंड्री केयर की जरूरत होती है, ऐसे मरीजोंं के इलाज में कम्युनिटी एंड फेमिली मेडिसिन जैसे विभाग अपनी अहम भूमिका निभा सकते हैं, साथ ही राज्य सरकार के अस्पताल भी नर्सिंग में अपनी भूमिका बढ़ा सकते हैं।

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उन्होंने बताया कि संस्थान में अधिकांशतः ट्रॉमा और इमरजेंसी के केस आते हैं, जिसके लिए हमारे द्वारा इमरजेंसी में किसी को भी इलाज के लिए मना नहीं किया जा रहा है, मगर इस कार्य में सबसे बड़ी अड़चन बेड्स की उपलब्धता की आ रही है, आज हमारे 960 बेड्स हैं जो कि मरीजों की संख्या के सापेक्ष काफी कम लगते हैं साथ ही इमरजेंसी चलाने के लिए उपलब्ध स्थान कम पड़ने लगा है। उन्होंने बताया कि ट्रॉमा व इमरजेंसी को एक ही जगह पर संचालित करने में कई तरह की तकनीकि दिक्कतें आ रही हैं, लिहाजा राज्य सरकार से एम्स संस्थान के लिए 200 एकड़ भूमि और मिलने पर इसका विस्तारीकरण किया जाएगा।
उन्होंने आश्वस्त किया कि फैकल्टी सदस्यों के सहयोग से हम मरीजों को अस्पताल में अन्य महत्वपूर्ण सुविधाएं जैसे लिवर और किडनी ट्रांसप्लांट सेवा जल्द ही मुहैया कराएंगे।

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