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दैविक मंत्रोच्चार के साथ यमुनोत्री धाम के कपाट हुए शीतकाल के लिए बंद ।

दैविक मंत्रोच्चार के साथ यमुनोत्री धाम के कपाट हुए शीतकाल के लिए बंद —

अब 6 माह खरसाली में होंगी मां यमुना की पूजा-अर्चना।

सुभाष बडोनी उत्तरकाशी

यमुनोत्री धाम :-
भैय्या दूज पर्व पर गुरुवार को यमुनोत्री धाम के कपाट विधि-विधान और दैविक मंत्रोच्चार के बीच ठीक दोपहर 12 बजकर 30 मिनट पर शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए।

इस शुभ अवसर पर सैकड़ों तीर्थयात्रियों ने धाम में उपस्थित होकर मां यमुना के दर्शनों का लाभ लिया।

कपाट बंद होने की परंपरा के अनुसार खरसाली गाँव से समेश्वर देवता (शनिदेव) की डोली मां यमुना को लेने यमुनोत्री धाम पहुँची थी।

कपाट बंद होने के बाद शनिदेव की अगुवाई में मां यमुना की भोगमूर्ति और उत्सव डोली,ढोल नगाड़ा व संखनाद की धुन में शीतकालीन प्रवास खरसाली गद्दीस्थल मंदिर के लिए रवाना हो गई।

यमुनोत्री में बर्फबारी के चलते अब शीतकाल में मां यमुना की पूजा-अर्चना एवं देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के दर्शन खरसाली मंदिर में ही होंगे, जहाँ अगले छह माह तक धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए जाएंगे।
धाम परिसर ‘जय मां यमुना’ के जयकारों से गूंज उठा। बर्फ से ढके पर्वतों और ठंडी हवाओं के बीच जब मां यमुना की डोली यात्रा के लिए रवाना हुई तो श्रद्धालुओं की आंखें आस्था और भावनाओं से नम हो उठीं।
कपाट बंद होने की इस पावन बेला पर उपजिलाधिकारी बृजेश कुमार तिवारी सहित सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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