khabaruttrakhand
आकस्मिक समाचारउत्तराखंडटिहरी गढ़वालदिन की कहानीप्रभावशाली व्यतिविशेष कवरस्टोरीस्वास्थ्य

एनीमिया के प्रत्येक रोगी को रक्त चढ़ाना जरूरी नहीं – सटीक पहिचान के बाद ही इलाज शुरू करना लाभकारी।

– एनीमिया के प्रत्येक रोगी को रक्त चढ़ाना जरूरी नहीं
– सटीक पहिचान के बाद ही इलाज शुरू करना लाभकारी
– एम्स ऋषिकेश के चिकित्सकों ने इलाज के दौरान किए अध्ययन से की पुष्टि

यदि कोई व्यक्ति एनीमिया की बीमारी से ग्रसित है और उसे बार-बार रक्त चढ़ाने की आवश्यकता होती है तो यह खबर उनके लिए महत्वपूर्ण है। ऐसे एक रोगी का इलाज करने के दौरान एम्स ने पुष्ट किया है कि जरूरी नहीं कि एनीमिया का प्रत्येक रोगी रक्त चढ़ाने से ठीक हो जाय। इसलिए एनीमिया से ग्रसित रोगी को खून चढ़ाने से पहले उसकी गहन जांच और एनीमिया का कारण जानना बहुत जरूरी है।

ज्यादातर एनीमिया में खून चढ़ाना जरूरी होता है लेकिन ऑटोइम्यून एनीमिया में सही पहचान और दवा ही असरदार इलाज है। इस तथ्य को एम्स ऋषिकेश के चिकित्सकों ने इलाज के दौरान प्रमाणिक किया है। बतादें कि एनीमिया एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर में खून की लाल कोशिकाएँ (हीमोग्लोबिन) कम हो जाती हैं और इस वजह से शरीर के अंगों तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुँच पाती है। इससे व्यक्ति को थकान, कमजोरी, चक्कर आना, और सांस फूलने जैसी समस्याएँ हो सकती हैं। एनीमिया के सामान्य कारणों में आयरन, फोलिक एसिड या विटामिन 12 की कमी, अत्यधिक रक्तस्राव होना शामिल है। चिकित्सकों के अनुसार बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों में इसका खतरा ज्यादा होता है।

पिछले महीने एम्स ऋषिकेश की इमरजेन्सी में यूपी मुरादाबाद की रहने वाली एक 55 वर्षीय महिला अत्यधिक कमजोरी, चक्कर आने और थकान और कुछ दिनों से दाहिनी ओर पेट व कमर में तेज दर्द व उल्टियां होने, आंखों तथा पेशाब का रंग पीला पड़ने की शिकायत लेकर आयी थी। महिला ने बताया कि कुछ इसी प्रकार की समस्या उसे 6 महीने पहले भी हुई थी। उसने समय-समय पर कई यूनिट ब्लड चढ़ाया लेकिन स्थायी फायदा नहीं हुआ। उसका हीमोग्लोबिन मात्र 4.4 ग्राम प्रति डेसीलीटर रह गया था। रोगी को जनरल मेडिसिन विभाग के तहत भर्ती करके इलाज शुरू किया गया। बीमारी का लंबे समय से बने रहने के कारणों को देखते हुए एम्स के चिकित्सकों ने इस पर व्यापक सघन जांच करने के उपरांत ही इलाज करना उचित समझा। रक्त जांच से पता चला कि रोगी को मैक्रोसाइटिक हाइपर प्रोलिफेरेटिव एनीमिया है। इस बीमारी की वजह से शरीर नई लाल रक्त कोशिकाएं तो बना रहा था, लेकिन वो कोशिकाएं उतनी ही तेजी से नष्ट भी हो रही थीं। यह पाया गया कि रोगी के रक्त में रेटिकुलोसाइट काउंट 30 प्रतिशत था तथा एलडीएच स्तर भी बढ़ा हुआ मिला, जो लाल रक्त कोशिकाओं के निरंतर टूटने (हेमोलाइसिस) का स्पष्ट संकेत है। इन सभी विभिन्न जांच परिणामों के आधार पर यह स्पष्ट हुआ कि रोगी में लाल रक्त कोशिकाओं के अत्यधिक टूटने (हेमोलाइसिस) की समस्या है जो ऑटोइम्यून हेमोलिटिक एनीमिया की ओर संकेत करती है।

एम्स ने क्या किया
चिकित्सकों की टीम ने रोगी की विस्तृत इम्यूनो-हेमेटोलॉजिकल जांच की। इससे वॉर्म ऑटोइम्यून हेमोलिटिक एनीमिया (एआईएचए) का पता चला और साथ में फोलेट की गंभीर कमी पाई गयी। बीमारी की सटीक और सही समय पर पहिचान कर लिए जाने से रोगी को तत्काल रक्त चढ़ाने के बजाय उसे कारण-आधारित इलाज को प्राथमिकता दी गयी।

फिर स्टेरॉयड आधारित दवाओं के अलावा रोगी को फोलेट व अन्य सपोर्टिव दवाएँ दी गयी और अनावश्यक रक्त आधान से रोगी का बचाव किया। नतीजा यह रहा कि इलाज का सटीक तरीका अपनाने से रोगी का हीमोग्लोबीन 4.4 से बढ़कर 8.2 हो गया और कुछ ही दिनों में वह स्वस्थ हो गयी।

जनरल मेडिसिन विभाग के हेड प्रोफे. रविकांत के मार्गदर्शन में हुई अध्ययन युक्त इलाज की इस प्रक्रिया में जनरल मेडिसिन विभाग के डाॅ. पीके पण्डा, डाॅ. दरब सिंह, डॉ अक्षिता और डॉ गगन दलाल सहित ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग की हेड डाॅ. गीता नेगी, डॉ आशीष जैन व डॉ दलजीत कौर शामिल थे।

इंसेट
’’एनीमिया मुख्यतः चार प्रकार का होता है लेकिन जरूरी नहीं कि प्रत्येक एनीमिया में रक्त चढ़ाया जाय। इसमें सही समय पर की गई सटीक पहचान ही सुरक्षित और प्रभावी इलाज का आधार है।

यह मामला कारण-आधारित चिकित्सा के महत्व को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।

एनीमिया ग्रसित रोगी के इलाज में पहले पहिचान फिर इलाज का फार्मूला अपनाया जाना बहुत जरूरी है।’’ ———- डाॅ. पीके पण्डा, जनरल मेडिसिन विभाग एम्स।

इंसेट
’’ट्रांस्फयूजन मेडिसिन विभाग की हेड प्रो. गीता नेगी का कहना है कि हीमोलिटिक एनीमिया, खासतौर से ऑटोइम्यून हीमोलिटिक एनीमिया (एआईएचए) के इलाज के लिए किसी भी रक्त आधान (ब्लड चढ़ाने की प्रक्रिया) पर विचार करने से पहले रोगी के शरीर में समय पर विस्तृत और गहन इम्यूनो हेमेटोलॉजिकल मूल्यांकन करना आवश्यक है।’’—- प्रो. गीता नेगी, हेड, ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग एम्स।

Related posts

जनपद टिहरी में सादगी से मनाया गया राज्य स्थापना दिवस;जनपद प्रभारी मंत्री जी ने उत्तराखण्ड सरकार की दीनदयाल मातृ-पितृ तीर्थाटन योजना के तहत 33 सदस्यीय ग्रामीण बुजुर्गो के दल को डायजर नई टिहरी से हरी झण्डी दिखाकर श्री बद्रीनाथ धाम के लिए किया रवाना।

khabaruttrakhand

लोकसभा सामान्य निर्वाचन-2024 की मतगणना के मध्य नजर जिला सूचना कार्यालय में जिला मीडिया अनुवीक्षण एवं प्रमाणन समिति (एमसीएमसी) के नोडल अधिकारी की अध्यक्षता में एक कार्याशाला का किया गया आयोजन। जाने अधिक।

khabaruttrakhand

आरसीएमएस के तहत ऑनलाइन पोर्टल पर अपडेशन शतप्रतिशत करें-जिलाधिकारी टिहरी।

khabaruttrakhand

Leave a Comment

Verified by MonsterInsights