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मधुमेह, उच्च रक्तचाप से ग्रसित रोगी नियमित कराएं गुर्दा जांच -किडनी डिजीज हिस्ट्री वाले पारिवारिकजनों के लिए भी नियमित परीक्षण जरूरी।

मधुमेह, उच्च रक्तचाप से ग्रसित रोगी नियमित कराएं गुर्दा जांच
-किडनी डिजीज हिस्ट्री वाले पारिवारिकजनों के लिए भी नियमित परीक्षण जरूरी
-नेफ्रोलॉजी आईपीडी में नुक्कड़ नाटक के जरिए किया गया लोगों को बीमारी के प्रति जागरूक
-विश्व गुर्दा दिवस पर एम्स में किडनी रोग जनजागरूकता अभियान।

विश्व गुर्दा दिवस के अंतर्गत एम्स,ऋषिकेश में मरीजों व तीमारदारों को किडनी रोग से संबंधित विस्तृत जानकारियां दी गई।

इस दौरान चिकित्सकों व नर्सिंग ऑफिसरों द्वारा उन्हें बीमारी के प्रारंभिक लक्षण, संकेत, इस बीमारी से ग्रसित होने से बचाव के एहतियातन उपाय और बीमारी से ग्रसित हो चुके लोगों के लिए जरूरी सावधानियों, खानपान, दिनचर्या से संबंधित जानकारियां दी गई। जबकि नर्सिंग स्टूडेंट्स द्वारा नेफ्रोलॉजी आईपीडी में नुक्कड़ नाट्य प्रस्तुति के माध्यम से मरीजों व उनके तीमारदारों को इस बीमारी को लेकर जागरूक किया गया।

एम्स के गुर्दा रोग विभाग के तत्वावधान में वर्ल्ड किडनी- डे के उपलक्ष्य में आयोजित जन जागरूकता मुहिम के अंतर्गत गुर्दा रोग विभाग की आईपीडी ( वार्ड) में नर्सिंग विद्यार्थियों ने लोगों को गुर्दे की बीमारी के प्रारंभिक लक्षणों से अवगत कराया। जबकि नर्सिंग स्टाफ द्वारा मरीजों व उनके तीमारदारों को किडनी की बीमारी से ग्रसित मरीजों की डाइट संबंधी विस्तृत जानकारी दी।
इस दौरान उन्होंने बीमारी के प्रति जनमानस में फैली विभिन्न भ्रांतियों (मिथक) को दूर करने के साथ ही उनके द्वारा पूछे गए बीमारी से जुड़े सवालों का निस्तारण भी किया गया।

बताया गया कि किडनी हमारे शरीर का महत्वपूर्ण अंग है, जो रक्त से अपशिष्ट पदार्थों के अलावा पानी को छानकर मूत्र के जरिए शरीर से बाहर निकालता है। साथ ही यह अंग हमारे शरीर के रक्तचाप को नियंत्रित रखने, शरीर में सोडियम और पोटेशियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाने, अम्ल व क्षार संतुलन को ठीक रखने आदि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
उन्होंने बताया कि किडनी संबंधी बीमारी के शुरुआती चरणों में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते। लिहाजा शरीर लंबे समय तक कम किडनी कार्यक्षमता के साथ स्वयं को संभाल लेता है। इस बीमारी से ग्रसित मरीज को बीमारी के संकेत पैरों में सूजन, थकान, भूख कम लगना, उल्टी-मितली अथवा पेशाब कम होना जैसे लक्षण अक्सर तब दिखाई देते हैं जब किडनी की आधे से अधिक कार्यक्षमता पहले ही समाप्त हो चुकी होती है।
ऐसे में जिन लोगों को मधुमेह, उच्च रक्तचाप अथवा परिवार में गुर्दा रोग का इतिहास रहा है, उन्हें नियमितरूप से रक्त व मूत्र की जांच करानी चाहिए,जिससे बीमारी का शुरुआती चरण में ही पता लगाया जा सके।
इस अवसर पर नेफ्रोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉक्टर शेरोन कंडारी, डॉ.दीपेश, सीनियर रेजिडेंट डॉ.संदीप कौर, डॉ. अभय, डॉ. सार्थक, डॉ. सयान सहित एसएनओ-एएनओ प्रह्लाद कुमार, अंजना, चंदू, नर्सिंग ऑफिसर अंजलि, मौसम, अखिलेश, गोपाल
के अलावा नर्सिंग स्टूडेन्ट्स मौजूद थे।

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