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ऋषिकेश एम्स में दो दिवसीय सीएमई में जुटे देशभर के चिकित्सा विशेषज्ञ -विशेषज्ञों ने कहा, जागरूकता से होगा मुंह के कैंसर (ओरल कैंसर) से बचाव ।

ऋषिकेश एम्स में दो दिवसीय सीएमई में जुटे देशभर के चिकित्सा विशेषज्ञ
-विशेषज्ञों ने कहा, जागरूकता से होगा मुंह के कैंसर (ओरल कैंसर) से बचाव
-मुंह के कैंसर के इलाज के साथ-साथ बीमारी की रोकथाम भी जरूरी

ऋषिकेश एम्स में आयोजित दो दिवसीय सीएमई में देशभर के चिकित्सा विशेषज्ञों ने देश में बढ़ रहे मुंह के कैंसर पर जागरूकता बढ़ाने और इसकी रोकथाम के बारे में व्यापक मंथन किया। इस दौरान ईएनटी विशेषज्ञों और हेड, नेक आन्कोलोजिस्टों ने मुंह के कैंसर के इलाज के साथ-साथ इसकी रोकथाम को भी जरूरी बताया।

एम्स ऋषिकेश के ईएनटी विभाग, फोरेन्सिक मेडिसिन और एनाटॉमी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सीएमई में देशभर के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों के चिकित्सा विशेषज्ञों ने मुंह के कैंसर की रोकथाम और इससे बचाव के बारे में व्यापक चर्चा की। इस उपलक्ष्य में“अपडेट्स इन ओरल कैंसर कम केडवेरिक डिसेक्शन वर्कशाप” विषय पर कार्यक्रम आयोजित किया गया।

सीएमई का संस्थान की कार्यकारी निदेशक प्रोफेसर डॉ. मीनू सिंह, डीन एकेडेमिक प्रोफेसर डॉ. जया चतुर्वेदी एवं चिकित्सा अधीक्षक प्रो. बी. सत्या श्री ने संयुक्तरूप से विधिवत उद्घाटन किया और इस आयोजन को सभी चिकित्सकों के लिए विशेष लाभदायक बताया। उन्होंने एम्स ऋषिकेश में ओरल कैंसर के उपचार और जांच विषयक सीएमई के आयोजन के लिए ईएनटी विभाग की सराहना की और कहा कि विभाग की इस पहल से शिरकत करने वाले सभी प्रतिभागी लाभान्वित होंगे।

कार्यक्रम के आयोजन अध्यक्ष व एम्स ऋषिकेश के ईएनटी विभागाध्यक्ष प्रो. मनु मल्होत्रा ने बताया कि भारत में मुंह का कैंसर सबसे आम कैंसर है। उन्होंने कहा कि मुंह के कैंसर से ग्रसित लोगों का जीवन बेहतर बनाए रखने के लिए व्यापक कार्ययोजना बनाने की आवश्यकता है।

सीएमई की आयोजन सचिव डॉ. मधु प्रिया ने कार्यशाला में शिरकत करने वाले सभी चिकित्सकों, शोधकर्ताओं का आभार व्यक्त किया। उन्होंने बढ़ते मुंह के कैंसर के मामलों पर गंभीर चिंता व्यक्त की। डॉ. मधु प्रिया ने बताया कि ओरल कैंसर अवेर्नेस माह अप्रैल के अंतर्गत आयोजित कार्यक्रम में मुंह के कैंसर के लक्षणों की पहचान नितांत जरूरी है। लिहाजा निरंतर जनजागरुकता मुहिम चलाकरलोगों को इस गंभीर बीमारी से ग्रसित होने से बचाया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि कार्यशाला में देशभर से करीब 200 कैंसर स्पेशलिस्टों ने प्रतिभाग किया और मुंह के कैंसर की नई तकनीकों के अध्ययन एवं उपचार के अनुभवों को साझा किया।

सीएमई को मुख्य वक्ता के तौर पर अमृता इंस्टीट्यूट कोच्चि के प्रो. दीपक बालासुब्रह्मणियम और टाटा मेमोरियल अस्पताल, मुंबई की प्रो. पूनम जोशी ने संबोधित किया। उन्होंने हेड एण्ड नेक तथा ओंको सर्जरी विभाग के युवा चिकित्सकों से आह्वान किया कि वह ओरल कैंसर के इलाज के क्षेत्र में अनुभव हासिल करने के लिए इस प्रकार के आयोजनों में अवश्य प्रतिभाग करें, जिससे वह प्रैक्टिकली अपनी स्किल विकसित कर सकें।
इस दौरान संस्थान के फोरेसिंक मेडिसिन विभाग और एनाटॉमी विभाग में केडवेरिक डिसेक्शन वर्कशॉप भी आयोजित की गई।

इस अवसर पर युवा विद्यार्थियों और सर्जन को प्रोसाहित करने हेतु अवार्ड पेपर और ई-पोस्टर का भी आयोजन किया गया।

केडवेरिक डाईसेक्शन वर्कशॉप के सफल संचालन में फोरेंसिक विभागाध्यक्ष प्रो. बिनाय कुमार बस्तिया, डॉ. रवि प्रकाश, मेशराम, एनाटॉमी विभाग के प्रो. मुकेश सिंगला, प्रो. रश्मि मल्होत्रा, डॉ. राजीव चौधरी, डॉ. राजू बोकन और कर्ण, नासा,शल्योपचार एवं कंठ, हेड-नेक सर्जरी विभाग से प्रो. मनु मल्होत्रा, डॉ. मधु प्रिया, डॉ. अमित कुमार त्यागी, डॉ. अभिषेक भारद्वाज और हेड-नेक ऑनकोलोजिस्ट डॉ.पल्लवी, डॉ. विक्रमजीत आदि का विशेषरूप से योगदान रहा। इस अवसर पर आयोजन अध्यक्ष एवं आयोजन सचिव ने सभी रेसीडेंट चिकित्सकों, विभागीय कार्मिकों का सीएमई को सफल बनाने के लिए आभार व्यक्त किया ।

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