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भिटौली प्राचीन परंपरा है जो अभी भी देखने को मिलता है। प्रोफेसर ललित तिवारी।

स्थान ।नैनीताल।
भिटौली प्राचीन परंपरा है जो अभी भी देखने को मिलता है। प्रोफेसर ललित तिवारी।
रिपोर्ट। ललित जोशी।
नैनीताल। सरोवर नगरी समेत पूरे उत्तराखंड में विवाहित पुत्री को चेत महीने में भिटौली देना एक प्राचीन परंपरा है।
इस दौरान एक भेंट में डीएसबी कॉलेज के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर ललित तिवारी ने हमारे जिला संवाददाता ललित जोशी को एक भेंट में बताया।
उन्होंने बताया उत्तराखंड में भिटौली एक बहुत प्राचीन परंपरा है जिसमे माता पिता, भाई, द्वारा विवाहित बिटिया को वस्त्र ,पकवान,एवं उपहार दिए जाते हैं जिससे बिटिया अति प्रशन्न नजर आती है। उन्होंने कहा चेत का महीना 30 दिन का होता है इसी माह भिटौली दी जाती है। भिटौली में एक पकवान बनाया जाता है जिसे साई कहा जाता है जो चावल को पीसकर भूनकर उसमें मीठा आदि डालकर बनाया जाता है। जिसको, माता, पिता, भाई अपनी विवाहित बिटिया, बहिन के लिए ले जाता है साथ मे मिष्ठान फल आदि लेकर उसके ससुराल जाते हैं जहाँ उसको यह सब दिया जाता है। वह विवाहित बिटिया अपने आस पड़ोस में भिटौली मायके से आई है करके सभी लोगों को खुशी खुशी मिष्ठान पकवान आदि बाटती हैं। प्रोफेसर तिवारी ने बताया भिटौली एक ऐसा पर्व है जो स्नेह व प्रेम को दर्शाता है । प्राचीन समय से यह परंपरा चली आ रही है जो जीवंत काल चलती ही जायेगी।

इससे मानवीय प्रेम झलकता है।यह भिटौली पर्व उत्तराखंड राज्य के अलावा तमाम राज्यों में भी मनाने लग गए हैं।

पूर्व की अगर बात करें तो विवाहित बिटिया का ससुराल कई कोशो दूर होता था केवल एक पत्र ही माध्यम हुआ करता था तो बुजुर्ग लोगों ने एक परंपरा बनाई की शादी वाली बिटिया के ससुराल कैसे जाया जाये तो उन्होंने भिटौली एक पर्व बना दिया जिसमें सालभर में एक बार विवाहित बिटिया से मुलाकात हो जाएगी और उसकी कुशल बात आदि भी जानकारी प्राप्त हो जाएगी।
आज तो संचार माध्यमों से हाल चाल दिन में कई बार जाना जाता है।

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