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ब्रेकिंग:-एम्स ऋषिकेश में आयोजित नेशनल स्तर की सीएमई कम वर्कशॉप में देशभर से आए विशेषज्ञ चिकित्सकों ने मेडिकल के क्षेत्र में कॉग्निटिव साईंस को बहुउपयोगी बताया। इस दौरान प्रतिभागियों को प्रशिक्षण भी दिया गया।

एम्स ऋषिकेश में आयोजित नेशनल स्तर की सीएमई कम वर्कशॉप में देशभर से आए विशेषज्ञ चिकित्सकों ने मेडिकल के क्षेत्र में कॉग्निटिव साईंस को बहुउपयोगी बताया। इस दौरान प्रतिभागियों को प्रशिक्षण भी दिया गया।

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, एम्स ऋषिकेश के फिजियोलॉजी विभाग के तत्वाधान में ’काग्निटिव फंक्शन टेस्टिंग एण्ड द रॉल ऑफ इमेरजिंग टैक्नीक’ विषय पर आयोजित सीएमई कम वर्कशॉप में मेडिकल के क्षेत्र में ज्ञानात्मक साईंस की उपयोगिता के बारे में विस्तार पूर्वक चर्चा की गई। संस्थान की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह के मार्गदर्शन और फिजियोलॉजी विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. लतिका मोहन के नेतृत्व में आयोजित इस नेशनल स्तर की सीएमई में वक्ताओं ने अपने विचार रखते हुए एक-दूसरे के साथ उक्त विषय पर अपने अनुभव साझा किए। फार्माकोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष व कार्यवाहक अधिष्ठाता प्रो. एस.एस हांडू ने कार्यशाला को प्रशिक्षण की दृष्टि से फार्माकोलॉजी विभाग के लिए भी भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने फिजियोलॉजी विभाग द्वारा न्यूरो डायग्नोस्टिक के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना की और कहा कि इससे मेडिकल के अन्य छात्र भी अनुभव हासिल कर सकेंगे।
इस अवसर पर चिकित्सा अधीक्षक प्रो. संजीव कुमार मित्तल ने कहा कि काग्निटिव साईंस के माध्यम से रोगी की देखभाल और उसके उपचार में भी लाभ उठाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस प्रशिक्षण कार्यशाला से न केवल बेसिक साईंस के रेजिडेन्टों को अपितु न्यूरोलॉजी व मेडिसिन के छात्रों को भी लाभ प्राप्त होगा। प्रो. मित्तल ने कहा कि संस्थान की निदेशक प्रो. मीनू सिंह के मार्गदर्शन में संस्थान मेडिकल के विभिन्न क्षेत्रों में उन्नति की ओर अग्रसर है।

कार्यक्रम के सह अध्यक्ष फिजियोलॉजी विभाग के प्रो. प्रशान्त पाटिल ने सीएमई और कार्यशाला के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि इस आयोजन के माध्यम से बेसिक मेडिकल साईंस और क्लीनिकल के छात्रों को विभिन्न स्तर से प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रो. पाटिल ने कहा कि वर्तमान में काग्निटिव र्साइंंस का विभिन्न क्षेत्रों में लाभ लिया जा रहा है। विभिन्न जांचों और मेडिकल तकनीकों में भी यह उपयोगी है।

सीएमई में एम्स नागपुर के डॉक्टर अशिलेष पाटिल, नेशनल इंस्टीटूयट ऑफ मेन्टल हेल्थ एण्ड न्यूरो साईंसेज बंगलौर के प्रो. देवव्रता कुमार और एम्स ऋषिकेश के फिजियोलॉजी विभाग की एडिशनल प्रो. डॉ. सुनीता मित्तल सहित कई अन्य गेस्ट फेकल्टी ने अपने व्याख्यान दिए। इसके अलावा एम्स बिलासपुर की प्रो. रूपाली पार्लेवार, नॉर्थ ईस्टन इंदिरा गांधी रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ एण्ड मेडिकल साईंसेज शिलांग की प्रो. ऋतु पर्णा बरुआ, जनरल मेडिसिन विभाग एम्स ऋषिकेश की विभागाध्यक्ष प्रो. मीनाक्षी धर और आयोजन सचिव फिजियोलॉजी विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ.अश्वनी महादुले ने भी संबोधित किया।

फिजियोलॉजी विभाग की डॉ. जयन्ती पन्त के संचालन में आयोजित कार्यक्रम में डॉ. योगेश, डॉ. अरूण गोयल, डॉ. पूर्वी कुलश्रेष्ठ, डॉ. पुनीत धमीजा, डॉ. मनीषा बिष्ट सहित कई चिकित्सक और मेडिकल के छात्र-छात्राएं मौजूद थे।

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